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નંદ ઘેર આનંદ ભયો, જય કનૈયા લાલ કી...



ईन्सान के जीवन का सफ़र अद्भूत मूल्यों और अवसरों से भरा है; बाल्यकाल में भक्तियोग, युवाकाल में कर्मयोग, वृद्धावस्था में ज्ञानयोग और तत्पश्चात समाधिस्थ होकर नवयुग के निर्माण में सबकुछ न्योछावर कर जाना।

कृ्ष्ण जन्माष्टमी पर्व युगों युगों से हमें संसार में संयमित रहकर तीनों योग को कैसे जीना चाहिए यही बोध देता है। जो तीनों योग को संतुलित कर सकते हैं वही भरपूर जीवन जीते हैं।

🙏जय श्री कृष्ण 🙏


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